Saturday, May 26, 2007

गर ये शर्त है

गर ये शर्त - -ताल्लुक है कि है हमको जुदा रहना
तो ख्वाबों में भी क्यूँ आओ़ खयालों में भी क्या रहना

शजर जख्मी उम्मीदों के अभी तक लहलहाते हैं
इन्हें पतझड़ के मौसम में भी आता है हरा रहना

पुराने ख्वाब पलकों से झटक दो सोचते क्या हो
मुकद्दर खुश्क पत्तों का, है शाखों से जुदा रहना

अजब क्या है अगर मखमूर तुम पर यूरिश- -गम है
हवाओं की तो आदत है चरागों से खफा रहना

No comments: